धनगर (Dhangar) भारत का एक प्राचीन पशुपालक, योद्धा और कृषक समुदाय है, जिसकी पहचान सदियों से पशुपालन, चरवाही और सैन्य सेवाओं से जुड़ी हुई है। “धनगर” शब्द संस्कृत के धेनु + गर से माना जाता है, जिसका अर्थ है—“पशु पालने वाला” या “गायों की रक्षा करने वाला”. यह भारत के सबसे पुराने चरवाहा समुदायों में से एक है।
धनगर समाज मुख्य रूप से महाराष्ट्र, कर्नाटक, गोवा, मध्य प्रदेश और गुजरात में पाया जाता है। कई ऐतिहासिक दस्तावेज बताते हैं कि धनगर समुदाय प्राचीन काल में जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में भेड़-बकरी पालन, गाय पालन और चरवाही करते थे। समाज की पहचान मजबूत शरीर, परिश्रम, और युद्ध कौशल के लिए मानी जाती है।
धनगर का इतिहास
धनगर की उत्पत्ति वैदिक काल से जुड़ी मानी जाती है। कई विद्वान इन्हें गोप/यादव संस्कृति से जोड़ते हैं, तो कई इन्हें क्षत्रिय पशुपालक वंश से संबंधित बताते हैं।
धनगर कभी व्यापारिक मार्गों पर चरवाही करते हुए लंबी दूरी तय किया करते थे, इसलिए इन्हें घुमंतू (Nomadic) और अर्ध-घुमंतू समुदाय भी कहा जाता है। इनके पास पशुपालन की विशेष तकनीक और अपने जानवरों को मौसम के अनुसार स्थानांतरित करने की परंपरा थी।
भारत में धनगर कहाँ पाए जाते हैं?
- महाराष्ट्र – सबसे बड़ी आबादी
- कर्नाटक
- गोवा
- आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्से
- गुजरात
- मध्य प्रदेश
धनगर जाति की उपजातियाँ
धनगर कई उपसमूहों में बँटी हुई है, जिनमें कुछ प्रमुख हैं:
- खेल Dhangar
- हरीप Dhangar
- गोले Dhangar
- शेपार्ड/Shepherd धनगर
- रामोशी Dhangar
- नायक Dhangar
हर उपजाति की अपनी अलग संस्कृति, पहनावा और पशुपालन शैली होती है।
धनगर का पारंपरिक कार्य
- भेड़-बकरी पालन
- गाय और भैंस पालन
- ऊन का व्यवसाय
- दूध उत्पादन
- कृषि
- जंगल आधारित आजीविका
धनगरों को भेड़ों की नस्ल सुधारने और पशुपालन की विशेष तकनीकों के लिए जाना जाता है।
धनगर का गोत्र और उपनाम
धनगर समाज कई गोत्रों और उपनामों का उपयोग करता है, जैसे:
- गोले
- कुरूबा
- नायक
- शिंदे
- चव्हाण
- भोसले
- जाधव
धनगर जाति किस वर्ग में आती है?
राज्यों के अनुसार वर्गीकरण अलग है:
- महाराष्ट्र – OBC
- कर्नाटक – OBC
- मध्य प्रदेश – OBC
- गोवा – OBC
कुछ राज्यों में लंबे समय से ST (Scheduled Tribe) दर्जे की भी मांग चल रही है।
धनगर और गडरिया / पाल में क्या फर्क है?
धनगर, पाल, और गडरिया तीनों ही पशुपालक समुदाय हैं, लेकिन राज्यों के अनुसार इनके नाम बदल जाते हैं:
- उत्तर भारत – गडरिया / पाल
- दक्षिण + महाराष्ट्र – धनगर
तीनों का काम, संस्कृति और परंपरा लगभग समान मानी जाती है।
धनगरों की जीवनशैली और संस्कृति
धनगर समाज अपनी अनोखी संस्कृति, पारंपरिक वेशभूषा और संगीत के लिए जाना जाता है। महिलाएँ रंग-बिरंगे परिधान पहनती हैं और पुरुष धोती, पगड़ी और कमर में कपड़ा बाँधकर चरवाही करते हैं।
लोकगीत, बांसुरी, ढोल और परंपरागत नृत्य इनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
FAQs
1. धनगर कौन होता है?
धनगर भारत का पारंपरिक पशुपालक और चरवाहा समुदाय है।
2. धनगर किस जाति में आते हैं?
अधिकतर राज्यों में OBC वर्ग में आते हैं।
3. क्या धनगर और गडरिया एक ही हैं?
पेशा और परंपरा लगभग समान है, क्षेत्र के हिसाब से नाम बदलता है।
4. धनगरों की भाषा क्या है?
मराठी, कन्नड़, हिंदी और स्थानीय बोलियाँ।
5. धनगर की मुख्य पहचान क्या है?
पशुपालन, चरवाही, ऊन व्यापार और ग्रामीण संस्कृति।